कॉफी स्टोर की रिटेल चैन ‘कैफे कॉफी डे’ के मालिक वीजी सिद्धार्थ की आत्महत्या की खबर सुनकर यही मैसेज दिमाग मे सबसे पहले कौंधा कि क्या नही था सिद्धार्थ के पास ? पैसे, शोहरत, रुतबा, वर्चस्व, प्रतिष्ठा और क्या नही? लेकिन कुछ सच में नही था सिद्धार्थ के पास, वो था ढंग के शुभचिंतक, जो उन्हें ऐसी मुश्किल घड़ी में सही राह दिखा पाते। सिद्धार्थ ने अपनी आखिरी चिट्ठी में खुद लिखा है कि जितना कर्ज़ उन पर है उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी उनके नाम पर है। इसका मतलब साफ है। पैसे होते हुए भी वे टूट गए, क्योंकि उनके पास कोई नही था, जो उन्हें सही-गलत में भेद समझा पाता।
